स्कूल से घर लौटते समय एक बच्चे ने एक बुज़ुर्ग माली को बहुत-से पानी के घड़े उठाए हुए देखा। बिना कहे ही बच्चे ने उनमें से दो घड़े बगीचे के फाटक तक पहुँचाने में मदद की।
माली ने मुस्कुराकर बच्चे को स्नेह से धन्यवाद दिया। कुछ दिनों बाद, तेज बारिश शुरू हो गई और वही बच्चा स्कूल में छाता भूल गया। संयोग से वही माली वहाँ से गुज़रा और बड़े छाते के नीचे उसे पूरे रास्ते घर तक ले गया।
दोनों में से किसी ने भी पहले से एक-दूसरे की मदद करने की योजना नहीं बनाई थी। लेकिन दयालुता ने उनके बीच पहले ही एक मार्ग बना दिया था।
उस दिन बच्चे ने समझा कि अच्छे काम गायब नहीं होते। वे दुनिया में बने रहते हैं और अक्सर तब लौटते हैं जब उनकी सबसे अधिक ज़रूरत होती है।