एक सुबह नन्हे हनुमान ने ऊपर देखा और चमकते सूरज को देखा। उन्हें वह आकाश में तैरता एक पका हुआ सुनहरा फल लगा।
आनंद और आत्मविश्वास से भरकर वे उसे पकड़ने के लिए ऊपर छलाँग लगा बैठे। देवता आश्चर्य से देखते रहे कि यह बालक निडर खुशी के साथ और ऊँचा उड़ता जा रहा है।
जल्दी ही बड़ों ने समझ लिया कि हनुमान की शक्ति असाधारण है, लेकिन बढ़ते हुए उसे मार्गदर्शन की भी आवश्यकता होगी। आशीर्वाद दिए गए ताकि उनका साहस हमेशा बुद्धि और सेवा के साथ जुड़ा रहे।
तब से हनुमान उद्देश्यपूर्ण ऊर्जा के प्रतीक बने रहे। वे बच्चों को याद दिलाते हैं कि उत्साह बहुत सुंदर है, जब वह देखभाल और अनुशासन से आकार पाता है।