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कर्पूरगौरं करुणावतारम् (शिव श्लोक)

शिव श्लोक / पद्य सरल - कोई भी जप कर सकता है सभी के लिए सुरक्षित
Original Sanskrit

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

Karpoora-gauram Karunaa-vataaram Samsaara-saaram Bhujagendra-haaram
Sadaa Vasantam Hridaya-aravinde Bhavam Bhavaani-sahitam Namaami

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अर्थ

मैं भगवान शिव को नमन करता हूं, जो कर्पूर की तरह गौर वर्ण के हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं, जो सर्प राज को हार की तरह धारण करते हैं, जो सदा हृदय कमल में निवास करते हैं, भवानी के साथ।

कब जप करना चाहिए

During Shiva puja, meditation, aarti, for peace.

सर्वोत्तम समय: Evening, Mondays, Pradosham

लाभ
Invokes Shiva's blessings, brings peace and compassion.
सुनना 🤖 TTS
SPEED

Pronunciation aid only — not a certified Vedic recitation.

प्रकार
श्लोक / पद्य
लंबाई
छोटा (1-2 पंक्तियाँ)
कठिनाई
सरल - कोई भी जप कर सकता है
देवता:
शिव
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