वापस
दुर्गा सूक्त — प्रारम्भिक श्लोक
ॐ जातवेदसे सुनवाम सोमं रातीयतो नि दहाति वेदः।
स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरितात्यग्निः॥
तामग्निवर्णां तपसा ज्वलन्तीं वैरोचनीं कर्मफलेषु जुष्टाम्।
दुर्गां देवीं शरणमहं प्रपद्ये सुतरसि तरसे नमः॥
0
/ 108
सुझाव: गिनती करने के लिए कीबोर्ड पर स्पेस या एंटर बटन का उपयोग करें।