गति, विराम और आवाज़ की तीव्रता
अधिकांश शुरुआती लोग बहुत तेज़ जपते हैं। थोड़ी धीमी गति जीभ और श्वास को साथ आने का समय देती है。
पहले बोलने वाली आवाज़ में जप करें। फिर हल्की फुसफुसाहट आज़माएँ। सारे शब्दों को जोड़कर भागने के बजाय वाक्यांश के अंत में छोटा विराम दें। सही गति जप को अधिक शांत और टिकाऊ बनाती है。