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Samarpana — Complete Offering

ॐ यद्यत्कर्म कृतं सर्वं हरये समर्पितम्। तेन तस्य प्रसादेन मुक्तिर्भवति मे ध्रुवम्॥ कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात्। करोमि यद्यत्सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि॥
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